ADMIN 07:07:48 PM 11 Feb, 2016

भीगी हुई आँखों का ये मंज़र न मिलेगा
घर छोड़ के मत जाओ कहीं घर न मिलेगा

फिर याद बहुत आएगी ज़ुल्फ़ों की घनी शाम
_____जब धूप में साया कोई सर पर न मिलेगा

आँसू को कभी ओस का क़तरा न समझना
________ऐसा तुम्हें चाहत का समुंदर न मिलेगा

इस ख़्वाब के माहौल में बे-ख़्वाब हैं आँखें
________जब नींद बहुत आएगी बिस्तर न मिलेगा

ये सोच लो अब आख़िरी साया है मोहब्बत
___________इस दर से उठोगे तो कोई दर न मिलेगा

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