Rakesh 12:00:00 AM 13 Jun, 2017

दिल ने एक एक दुख सहा तनहा,
अंजुमन अंजुमन रहा तन्हा;

ढलते सायों में तेरे कूचे से,
कोई गुज़रा है बारहा तन्हा;

तेरी आहट क़दम क़दम और मैं,
इस मइयत में भी रहा तन्हा;

कहना यादों के बर्फ़-ज़ारों से,
एक आँसू बहा बहा तनहा;

डूबते साहिलों के मोड़ पे दिल,
इक खंडर सा रहा सहा तन्हा;

गूँजता रह गया ख़लाओं में;
वक़्त का एक क़हक़हा तन्हा।

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